ऐतिहासिक कैंडियन युग की जागीर में एक क्षेत्रीय राष्ट्रीय संग्रहालय, जो सबारागामुवा के प्राकृतिक इतिहास, प्रागितिहास और लोक संस्कृति की खोज करता है।
सिंहावलोकन
रत्नापुरा का राष्ट्रीय संग्रहालय एहेलेपोला वालौवा में स्थित है, जो एक भव्य पुराना जागीर घर है जो कभी कैंडियन साम्राज्य के दरबारी एहेलेपोला निलामे का था। इसकी दीर्घाएँ सबरागामुवा क्षेत्र की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत पर ध्यान केंद्रित करती हैं, जिसमें जिले के रत्न बजरी में पाए जाने वाले प्रागैतिहासिक जीवाश्मों और जानवरों के अवशेष, विलुप्त जीवों के मॉडल, भूवैज्ञानिक और रत्न प्रदर्शन और लोक-संस्कृति कलाकृतियाँ शामिल हैं। एक शांत, छायादार पड़ाव जो रत्न-देश की यात्रा में गहराई जोड़ता है।
इतिहास
जागीर का नाम कैंडी के अंतिम राजाओं के एक वरिष्ठ अधिकारी एहेलेपोला निलामे के नाम पर रखा गया है। इमारत को बाद में राष्ट्रीय संग्रहालय विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया और 13 मई 1988 को रत्नापुरा के राष्ट्रीय संग्रहालय के रूप में जनता के लिए खोल दिया।
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